CrPC ( Criminal Procedure Code) Act 1973

CrPC ( Criminal Procedure Code), 1973

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973




IPC अपराध से संबधित दण्ड के बारे में ब्यौरा दिया गया है।
CrPC जब अपराध किया जाता है तो सदैव दो प्रक्रियाये होती है जिन्हे पुलिस अपराध ती जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में दूसरी आरोपी के संबंध होती है। इन दोनों प्रकार का ब्यौरा दिया गया है।
Note- 484 धारा तथा 37 अध्याय है।
Note- राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति- 25 जनवरी 1974
Note- लागू हुआ- 01 अप्रैल 1974
धारा परिचय
2 (a) जमानतीय अपराध (Bailable Offence) को परिभाषित करती है।
2 (c) संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) को परिभाषित करती है।
2 (d) परिवाद (शिकायत) (Complaint) को परिभाषित करती है।
2 (g) जांच (Inquiry) को परिभाषित करती है।
2 (h) अन्वेषण (Investigation) को परिभाषित करती है।
2 (i) असज्ञेय (Non- Cognizable) को परिभाषित करती है।
2 (n) अपराध (Offence) को परिभाषित करती है।
2 (o) थाने का भारसाधक अधिकारी (Officer in charge of Police Station) को परिभाषित करती है।
2 (r) पुलिस रिपोर्ट (Police Report) को परिभाषित करती है।
2 (s) पुलिस थाना (Police Station) को परिभाषित करती है।
2 (u) लोक अभियोजक (Publice Prosecutor) को परिभाषित करती है।
2 (wa) पीड़ित (Victim) को परिभाषित करती है।
2 (x) वारंट मामला (Warrant Case) को परिभाषित करती है।
8 राज्य सरकार किसी क्षेत्र को महानगर क्षेत्र तभी घोषित करेगी जब उसकी आबादी 10 लाख से अधिक हो।
28(1) उच्च न्यायलय विधि द्वारा प्रधिकृत कोई दण्डादेश दे सकता है।
28(2) सेशन न्यायधीश या अपर सेशन न्यायाधीश कोई भी दण्डादेश दे सकता है किन्तु उसके द्वारा दिये गये मृत्यु दण्डादेश की पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा किए जाने की आवश्यकता है।
28 (3) सहायक सेशन न्यायाधीश मृत्यु, आजीवन कारावास या 10 साल से अधिक अवधि के लिये कारावास के दण्डादेश के सिवाय कोई ऐसा दण्डादेश दे सकता है जो विधि द्वारा प्रधिकृत है।
29 (1) न्यायलय मजिस्ट्रेट का न्यायालय 7 वर्ष तक के कारावास का दण्ड दे सकता है।
29 (2) प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय 3 वर्ष तक के कारावास या दस हजार रूपये तक जुर्माना या दोनों का दण्ड दे सकता है।
29 (3) द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय 1 वर्ष तक के कारावास या पांच हजार रूपये तक जुर्माना या दोनों का दण्ड दे सकता है।
36 पुलिस अधिकारियों की शक्तियों से संबधित है।
37 जनता द्वारा मजिस्ट्रेट एवं पुलिस की सहायता से संबधित है।
41 पुलिस अधिकारी द्वारा बिना वारंत के गिरफ्तारी से संबधित है।
41 (a) पुलिस अधिकारी के समक्ष हाजिर होने की सूचना के संबंध मे है।
41 (d) गिरफ्तार किये गये व्यक्ति से पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के किसी भी अधिवक्ता से मिलने के अधिकार का प्रवधान करती हे।
42 नाम व निवास न बताने पर गिरफ्तारी के संबंध मे है।
44 मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ्तारी।
45 सशत्र बलों के सदस्यों को गिरफ्तारी के संरक्षण प्रदान करता हे।
46 गिरफ्तारी कैसे की जाये का संबंध में
52 आक्रमक आयुधों का अभिग्रहण करने की शक्ति।
54 (a) गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान
57 पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को 24 घंटो के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना बाध्यकारी है।
70 वारंट का प्रकार
76 बंदी को कोर्ट के सामने पेशी
77 गिरफ्तारी का वारंट भारत के किसी भी स्थान से निष्पादित किया जा सकता है।
82 किसी फरार व्यक्ति के हाजिर होने के लिये उदघोषणा जारी करता है।
83 फरार व्यक्ति की सम्पत्ति की कुर्की से सम्बन्धित है
93 तलाशी वारंट जारी किय़ा जाता है।
97 बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट के समान है।
125 भरण पोषण के अधिकार से संबन्धित है।
125 (a) अपने माता-पिता के भरण पोषण के लिये पुत्र एवं पुत्री दोनो जिम्मेदार है।
129 सिविल बल को प्रयोग द्वारा जमाव को तितर वितर करना
130 जमाव को तितर वितर करने के लिये सशत्र बल को प्रयोग
144 आशंकित खतरे या न्यूसेंस राकने के लिये जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा सशक्त मजिस्ट्रेट आदेश दे सकता है।
153 भारसाधक अधिकारी द्वारा उस थाने के सीमाओं के अन्दर बाट एवं मापो के निरिक्षण से संबधित है।
158 रिपोर्ट कैसे दी जायेगी
164 (a) बलात्कार की शिकार की चिकित्सा परीक्षा
174 आत्महत्या आदि पर पुलिस की जांच करने और रिपोर्ट करने से संबधित है।
438 अग्रिम जमानत मंजूर करने की शक्ति सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय को प्राप्त है।
Note-  जब किसी अभियुक्त को राज्य या जिला का पुलिस के द्वारा न्यायालय की आज्ञा से दूसरे राज्य या जिला में ले जाया जाता है तो इसे ट्रांजिट रिमांड कहा जाता है।

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